बिजौलियाँ: निजी स्कूल की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों का हल्लाबोल, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

बिजौलियाँ: निजी स्कूल की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों का हल्लाबोल, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
X

बिजौलियाँ (दीपक राठौर) । कस्बे में स्थित ट्रस्ट संचालित एवं सीबीएसई संबद्ध आचार्य विद्यासागर (AVS) पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नियमों के विरुद्ध की गई भारी फीस वृद्धि और बस किराए में बढ़ोतरी के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित अभिभावकों ने बुधवार को बिजौलियाँ उपखंड अधिकारी (SDM) अजीत सिंह राठौड़ को ज्ञापन सौंपकर स्कूल प्रबंधन की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की।

अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन "राजस्थान विद्यालय (फीस का विनियमन) अधिनियम, 2016" और सीबीएसई के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है।

बस किराए में 70 प्रतिशत की भारी वृद्धि

ज्ञापन में बताया गया कि स्कूल प्रबंधन ने बस फीस में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की है। पिछले सत्र तक जो वार्षिक किराया 5,000 रुपये था, उसे सीधे बढ़ाकर 8,500 रुपये कर दिया गया है। परिवहन शुल्क में एक साथ 3,500 रुपये (70%) की यह वृद्धि पूरी तरह अनुचित और तर्कहीन है।

नियमों को ताक पर रखकर वसूली का खेल

अभिभावकों ने एसडीएम को बताया कि नियमों के अनुसार कोई भी निजी संस्थान बिना 'स्कूल लेवल फीस कमेटी' (SLFC) की पारदर्शी बैठक और अभिभावकों की सहमति के बिना फीस नहीं बढ़ा सकता।

मुनाफाखोरी का आरोप: सीबीएसई नियमों के तहत ट्रस्ट संचालित स्कूल "लाभ रहित" होने चाहिए, लेकिन यहाँ फीस में 30-40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो शिक्षा के व्यवसायीकरण को दर्शाता है।

महंगी किताबों का बोझ: विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म और किताबें एक ही निर्धारित विक्रेता से खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। 60-100 रुपये वाली NCERT किताबों की जगह 300 से 700 रुपये तक की निजी पब्लिशर्स की किताबें लगाई गई हैं, ताकि मोटा कमीशन कमाया जा सके।

अभिभावकों की प्रमुख मांगें:

मनमाने फीस चार्ट और अत्यधिक बस किराए पर तुरंत रोक लगाई जाए।

स्कूल के आय-व्यय और SLFC की बैठकों के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जाँच हो।

जाँच पूरी होने तक पुराने शुल्क ढांचे के आधार पर ही प्रवेश सुनिश्चित करने के आदेश दिए जाएं।

अभिभावकों का कहना है कि मुनिश्री सुधासागर महाराज के आशीर्वाद से स्थापित इस संस्थान का मूल मंत्र "भेदभाव रहित शिक्षा" था, लेकिन वर्तमान प्रबंधन सेवाभावी आदर्शों के विपरीत कार्य कर रहा है।

Next Story