सीजफायर के बाद भारत के हाथ लगी बड़ी जीत! 7 साल बाद देश आ रहा ईरानी तेल, पहले जा रहा था चीन

नई दिल्ली/तेहरान । वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ी सफलता के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बुधवार को जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर (युद्धविराम) की घोषणा ने न केवल युद्ध के बादलों को छांटा है, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों को भी जमीन पर ला दिया है। बुधवार को वायदा बाजार में तेल की कीमतें 18 फीसदी तक टूटकर 8,775 रुपये प्रति बैरल पर आ गईं।
7 साल बाद भारत आएगा ईरानी तेल: 'जया' टैंकर ने बदला रास्ता
इस ऐतिहासिक समझौते का सबसे बड़ा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर देखने को मिल रहा है। ईरान पर से अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलने के संकेतों के बीच भारत 7 साल बाद तेहरान से कच्चे तेल की खेप प्राप्त करने जा रहा है।
रॉयटर्स और लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप (LSEG) के डेटा के अनुसार, कुराकाओ ध्वज वाला विशाल तेल टैंकर 'जया', जो पहले चीन की ओर जा रहा था, अब भारत के पूर्वी तट की ओर मुड़ चुका है। यह बदलाव वैश्विक तेल सप्लाई चेन में स्थिरता आने का बड़ा संकेत माना जा रहा है।
प्रमुख घटनाक्रम एक नजर में:
युद्धविराम का असर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई स्थगित करने का ऐलान किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): समझौते के तहत इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोला जाएगा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी आवागमन सुचारू रखने के संकेत दिए हैं।
IOC की बड़ी डील: सरकारी कंपनी 'इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन' (IOC) ने इस जहाज पर मौजूद तेल को खरीदा है, जो इसी सप्ताह के अंत तक भारतीय बंदरगाह पर पहुंच सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने और होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों में ईंधन की कीमतों में और नरमी देखी जा सकती है।
